कंप्यूटर से फ़ोन में किताबें भेजना
किताबें कुछ ही हों तो कोई भी तरीक़ा चल जाता है। सैकड़ों हों तो तरीक़े के हिसाब से लगने वाला समय बहुत बदल जाता है।
USB केबल
सबसे तेज़, इंटरनेट की ज़रूरत नहीं, और संख्या की व्यावहारिक सीमा नहीं।
- फ़ोन को केबल से जोड़िए।
- फ़ोन की सूचना में फ़ाइल ट्रांसफ़र चुनिए, «सिर्फ़ चार्जिंग» नहीं। जिनका फ़ोन कंप्यूटर पर दिखता नहीं, उनमें अधिकतर यही क़दम छूटा होता है।
- कंप्यूटर से फ़ोन का स्टोरेज खोलकर किताबें
DocumentsयाDownloadमें कॉपी कीजिए। - रीडर में आयात कीजिए।
मैक पर अलग ट्रांसफ़र प्रोग्राम की ज़रूरत पड़ सकती है।
क्लाउड
ड्राइव, वनड्राइव, ड्रॉपबॉक्स — तरीक़ा एक ही है। कंप्यूटर से चढ़ाइए, फ़ोन पर उतारिए।
कुछ किताबों के लिए सुविधाजनक है और केबल न हो तब काम आता है। बदले में डेटा और स्टोरेज ख़र्च होता है।
एक बारीकी है: क्लाउड ऐप से सीधे खोलने पर किताब अस्थायी फ़ाइल की तरह खुल सकती है और पढ़ी हुई जगह सहेजी नहीं जाती। पहले डिवाइस पर उतारकर फिर लाइब्रेरी में आयात करना ज़्यादा भरोसेमंद है।
एक ही नेटवर्क पर
कंप्यूटर और फ़ोन एक ही वाई-फ़ाई पर हों तो फ़ाइलें इंटरनेट पर गए बिना सीधे भेजी जा सकती हैं। केबल न हो और फ़ाइलें बड़ी हों तो यह काम आता है।
भेजने के बाद फ़ाइल कहाँ है
एंड्रॉइड में ऐप्स की पहुँच अलग-अलग हिस्सों तक होती है, इसलिए कॉपी की गई फ़ाइल हमेशा सामने नहीं आती।
सबसे भरोसेमंद तरीक़ा फ़ोन के फ़ाइल मैनेजर में नाम से खोजना है। मिल जाने पर देर तक दबाकर इसके साथ खोलें चुनिए।
ऐप कौन से फ़ॉर्मैट लेता है
आयात की स्क्रीन छह एक्सटेंशन दिखाती है: epub, pdf, mobi, azw3, txt, fb2। फ़ाइल सूची में न दिखे तो कारण प्राय: इन तीन में से एक है।
- अभी तक न खोला गया
.zip। - पुस्तकालय से मिली
.acsm। वह किताब नहीं है। - एक्सटेंशन है ही नहीं, या ग़लत लगा है।
भेजने के बाद न खुले तो
कॉपी बीच में टूट सकती है। कंप्यूटर और फ़ोन पर फ़ाइल का आकार मिलाकर देखिए। लक्षण ख़राब फ़ाइल पहचानना में हैं।
खुल जाए पर अक्षर टूटे दिखें तो भेजने का दोष नहीं है, वह एन्कोडिंग की बात है।